लडख़ड़ाते कदमों को एक नयी राह देते है
जो हार गये सो हार गये अब कुछ
जीतने की एक सफल कोशिश करते है |
खिलखिलाते फूलों की तरह फिर से मुस्कराते है |
बेखौफ़ होकर पक्षियों की तरह आसमान में
पंख फैलाकर फिर से उड़ने की कोशिश करते है
आज फिर से एक नयी शुरुआत करते है |
आज फिर एक बार अपनी किस्मत
को आज़माते है नयी खुशियों के साथ
कदम मिलाकर फिर से चलते है |
चलो आज फिर से एक कदम
सफलता की ओर बढ़ाते है |
चलो फिर से नयी मंजिले खोज़
कर नये सपनों की उड़ाने भरते हैं |
अंधेरों को हटा कर उजालों की राह
देखते है आज फिर से एक बार अपने
आप को खोजने की कोशिश करते है |
चलो आज फिर से कठोर पहाड़
पर चढ़ने की कोशिश करते है |
ठहरे समुद्र में तैरने की कोशिश
करते है नामुमकिन को फिर से
मुमकिन करने की जिद करते है
चलो आज फिर से कुछ जीतने
की सफल कोशिश करते है |

19 Comments
Too good
ReplyDeleteThanks Aishwarya and keep reading.
DeleteBahut khoob keeposting 😊😊😊
ReplyDeleteThanks and keep reading
DeleteBahot koob post
ReplyDeleteThank you
DeleteToo long time waiting for your poem . really nice👌
ReplyDeleteThank You.
DeleteMst hai
ReplyDeleteThanks
DeleteNice. Shayri
ReplyDeletenice
ReplyDeleteThanks
DeleteStay motivated ma'am!
ReplyDelete��☆☆☆☆☆
Thanks Punit and keep reading.
Deletebest poetry
ReplyDeleteThanks and keep reading.
Deletenice
ReplyDeleteThanks
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