बहुत सी ख्वाईशों को पूरा करना चाहती है ये ज़िन्दगी
कुछ छोटी कुछ बड़ी ख्वाईशों से सजी है ये ज़िन्दगी |
हर ख्वाईश को मुकम्मल करना चाहती ये ज़िन्दगी
ख्वाईशों के साहारे अक्सर जीना चाहती ये ज़िन्दगी |
धूप में तपती धरती को हमेशा बारिश की ख्वाईश रहती है
रेगिस्तान में चलते राहगीर को पानी की ख्वाईश रहती है |
लहरों से डगमगाती कश्ती को हमेशा साहिल तक पहुंचाने
की ख्वाईश रहती है और इंसानो को हमेशा आज़ाद परिंदो
की तरह आसमान में बेखौफ उड़ने की ख्वाईश रहती है |
कुछ ख्वाईशें मुकम्मल हो जाती है और कुछ ख्वाईशें
अधूरी रह जाती है ,जो मुकम्मल हो जाती है वो और
नयी ख्वाईशें दे जाती है, और जो अधूरी रह जाती है
वो अक्सर जीने की वजह दे जाती है पर इन ख्वाईशों
के बिना ज़िन्दगी की कल्पना नहीं की जा सकती है |
ये ख्वाईशें यूँही हमारा साथ देती रहे हमसे कभी दूर ना जायें
हर वक़्त एक नयी ख्वाईश हमें जीने की सही वजह दे जायें|
दिल को मशरूफ़ रखना हमेशा इन अनगिनत सी ख्वाईशों से
वरना कही ये ज़िन्दगी सिर्फ एक सज़ा ना बन कर रह जायें|
6 Comments
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ReplyDeleteI really Like Your Poetry It Touch My Soul. Thank You For Khawish
ReplyDeleteThanks and keep reading.
Deletenice
ReplyDeleteThanks
DeleteNice
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