कई बार लफ्ज़ कम पड़ जाते है
अपनी बात को समझाने में... 
और कई बार हमारी ख़ामोशी ही  
हमारे हर सवाल का जवाब बन जाती है... !!!!

 




खामोशियों की भी अपनी अलग ही एक दास्तान होती है।  
हालातो से मजबूर होकर अल्फ़ाज़ अक्सर बदल जाते है
पर खामोशियो का तो अपना अलग ही रुतबा होता है। 
किसी इंसान को भी एक फरिश्ता ही बना देती है।  

 



खामोशियाँ अक्सर कुछ न कह कर भी 
बहुत कुछ बयां ही कर जाया करती है।    
अंधेरो में भीं खूबसूरत सितारे जगा देती है।  
उदास चहेरे पर भी मुस्कराहट ला देती है।
हर मुसीबत से लड़ना सीखा ही देती है। 
खामोशियो की भी अपनी एकअहमियत है।