रंग बिरंगे फूल अपनी सुगंध से ,
महकाते है हमारे तन मन को,
टूट जाते है डाली से फिर भी,
न शोक मनाते ये खूबसूरत फूल।
कभी हृदय की शोभा बनते है ,
तो कभी चरणों में शीश नवाते है ,
हर्ष सहित स्वीकार कर दायित्व,
निभाते है अपने कर्तव्यों को।
कितने कोमल कितने नाजूक
खींचे सबको अपनी और
खुशबू दूर दूर तक फैलाते
सबको अपने पास बुलाते
सजा देते धरती को खूबसूरत
बग़ीचे से रंग बिरंगे खूबसूरत
फूल अपनी सुगंध से ।
रंग बिरंगे फूल चमन में खिल रहे है
अम्बर से धरती तक खुशबू फैला रहे है
काटों में भी रहकर जीना सीखा रहे है
सुख दुःख में सम रहने का पाठ पढ़ा रहे है।
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