रास्ते अक्सर गुम हो जाते है
मंजिलो की तलाश करने में |
अक्सर कदम लडख़ड़ा जाते है,
मंजिल तक पहुँचते पहुँचते |
अक्सर मंजिले उन्हें मिलती
है जो रास्तो की कठनाईयो
को पार कर आगे बढ़ते है |
बारिश में भी पंख फैलाकर
उड़ते हुए परिंदो को ही
मिलती है ये मंजिले |
समुद्र की गहराई में तैरते हुए
तैराकों को ही मोती मिलते है |
मंझधार में हौंसला जो बुलंद
रखते है सफलता अक्सर उनके
कदमों में शीश झुकाती है |
अपने हौसलों पर विश्वास
रख कर अंधेरो को पीछे
छोड़कर आगे बढ़ने वालो
को ही मिलती है ये मंजिले |
कठिन रास्तों पर चलते
हुए सर्दी, गर्मी, बरसात में
बिना रुके लगातार आगे
बढ़ते हुए कदमों को ही
मिलती है ये मंजिले |
10 Comments
nice
ReplyDeleteThanks
DeleteYou are beautiful and your poetry also beautiful
ReplyDeleteNice
Thank you
DeleteNice blog mam 💐
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteThanks
DeleteNice. This poetry show emotion and dignity of yours written.
ReplyDeleteThanks and keep reading.
DeleteAlways... Waiting for the next one.
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